रेवाड़ी त्न जिला कारागार में प्रजापिता ब्रह्मकुमारी ईश्वरीय विश्वविद्यालय की ओर से कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इसमें इंडिया बुक ऑफ रिकॉर्ड में नाम दर्ज कराने वाले ब्रह्मकुमार भगवान ने विशेष रूप से संबोधित किया। उन्होंने विभिन्न प्रसंगों के माध्यम से सफल जीवन के मंत्र बताए। उन्होंने कहा कि जब महर्षि वाल्मीकि ने अपने जीवन में किए हुए अपराधों को महसूस कर स्वयं के संस्कारों को परिवर्तन कर रामायण लिखने वाले वाल्मीकि बने तो क्या हम अपनी गलतियों को सुधार कर महान नहीं बन सकते। उन्होंने कहा कि यह कारागार नहीं बल्कि सुधारगृह है। इसमें व्यक्ति को अपनी बुराइयों का सुधार करने के लिए रखा गया है। बदला लेने से समस्या का समाधान होने के बजाय और बढ़ जाती हैं इसलिए स्वयं को बदलना चाहिए। कारागृह स्वयं में परिवर्तन लाने की तपोस्थली है। इस एकांत के तपोस्थली में बैठकर स्वयं को परिवर्तन करने के लिए सोचना चाहिए। जिस बुराई के कारण वे यहां आए हैं उस बुराई को त्याग करने का संकल्प लेना चाहिए। हमारी वृत्ति, दृष्टि और कृति में जो अवगुण या बुराइयों हैं उसे भगाना चाहिए। उन्होंने जीओ और जीने दो की भावना को विकसित करने का आह्वान किया। इस मौके पर जेल उपाधीक्षक अशोक शर्मा ने ऐसे आयोजनों को निरंतर करते रहने का आह्वान किया।

रेवाड़ी त्न जिला कारागार में प्रजापिता ब्रह्मकुमारी ईश्वरीय विश्वविद्यालय की ओर से कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इसमें इंडिया बुक ऑफ रिकॉर्ड में नाम दर्ज कराने वाले ब्रह्मकुमार भगवान ने विशेष रूप से संबोधित किया। उन्होंने विभिन्न प्रसंगों के माध्यम से सफल जीवन के मंत्र बताए। उन्होंने कहा कि जब महर्षि वाल्मीकि ने अपने जीवन में किए हुए अपराधों को महसूस कर स्वयं के संस्कारों को परिवर्तन कर रामायण लिखने वाले वाल्मीकि बने तो क्या हम अपनी गलतियों को सुधार कर महान नहीं बन सकते। उन्होंने कहा कि यह कारागार नहीं बल्कि सुधारगृह है। इसमें व्यक्ति को अपनी बुराइयों का सुधार करने के लिए रखा गया है। बदला लेने से समस्या का समाधान होने के बजाय और बढ़ जाती हैं इसलिए स्वयं को बदलना चाहिए। कारागृह स्वयं में परिवर्तन लाने की तपोस्थली है। इस एकांत के तपोस्थली में बैठकर स्वयं को परिवर्तन करने के लिए सोचना चाहिए। जिस बुराई के कारण वे यहां आए हैं उस बुराई को त्याग करने का संकल्प लेना चाहिए। हमारी वृत्ति, दृष्टि और कृति में जो अवगुण या बुराइयों हैं उसे भगाना चाहिए। उन्होंने जीओ और जीने दो की भावना को विकसित करने का आह्वान किया। इस मौके पर जेल उपाधीक्षक अशोक शर्मा ने ऐसे आयोजनों को निरंतर करते रहने का आह्वान किया।